तकबीर के अल्फ़ाज़(Takbeer Ke Alfaaz)






सहाबा रज़ियल्लाहू अन्हु से तकबीरात के मुख़्तलिफ़ अल्फ़ाज़ वारिद हैं, इनमें से किसी को भी इख़्तियार किया जा सकता है।
(اَللہُ أَکْبَرْ اَللہُ أَکْبَرْ لَا إِ لَہَ إِلَّا اللہُ وَاللہُ أَکْبَرْ اللہُ أَکْبَرْ وَلِلہِ الْحَمْدُ)
(अल्लाहु अक्बर् अल्लाहु अक्बर्, ला इलाह इल्लल्लाहु वल्लाहु अक्बर्, अल्लाहु अक्बर् व लिल्लाहिल् हम्द)
(इरवाउल ग़लील जिल्द 3 स. रक़म 654, क़ालुल अल्बानी: इस्नादुहु सहीह)
(اَللہُ أَکْبَرْ اَللہُ أَکْبَرْ اَللہُ أَکْبَرْ وَلِلہِ الْحَمْدُ اللہُ أَکْبَرْ وَأَجَلُّ اللہُ أَکْبَرْ عَلَی مَا ھَدَ انَا)
(अल्लाहु अक्बर् अल्लाहु अक्बर् अल्लाहु अक्बर् व लिल्लाहिल् हम्द, अल्लाहु अक्बर् व अजल्लु, अल्लाहु अक्बर् अ़ला मा हदाना)
(बैहक़ी, इरवाउल ग़लील जि.3 स.125, क़ालल अल्बानी: सनदुहु सहीह)
तम्बीह:
यह तकबीरात इज्तिमाई तौर पर ना पढ़ी जाएं, इसलिए कि यह ना तो अल्लाह के नबी ﷺ से मन्क़ूल है और ना सलफ़े सॉलेहीन के अमल से इसका सबूत मिलता है, बल्कि सुन्नत का तरीक़ा यह है कि हर शख़्स इन्फ़िरादी तौर पर तकबीरात पढ़े।