Qurbani Ke Fajail Wa Masail









क़ुर्बानी के फ़ज़ाइल व मसाइल

इरशादे रबानी है
(لَنْ یَنَالَ اللہَ لُحُو مُھَا وَلَا دِمَاؤُھَا وَلَکِنْ یَنَا لُہُ التَّقْوٰی مِنْکُمْ)
अल्लाह तआला को क़ुर्बानी का गोश्त नहीं पहुंचता और ना ही उसका ख़ून, बल्कि उसे तो तुम्हारा तक़वा पहुंचता है। (सूरह अल-हज: 37)
और दूसरी जगह इरशाद है:
(فَصَلِّ لِرَبِّکَ وَانْحَرْ)
तू अपने रब के लिए नमाज़ पढ़ और क़ुर्बानी कर। (सूरह अल-कौसर: 3)

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