सब अहले ख़ाना की तरफ़ से एक बकरी का काफ़ी होना:
अता बिन यसार रज़ियल्लाहू अन्हु फ़रमाते हैं कि मैंने अबू अय्यूब अन्सारी रज़ियल्लाहू अन्हु से पूछा किया कि अल्लाह के रसूल ﷺ के ज़माने में लोग क़ुर्बानी किस तरह दिया करते थे? उन्होंने कहा कि एक शख़्स एक बकरी की क़ुर्बानी अपने और अपने घर वालों की जानिब से करता था। (तिर्मिज़ी, इब्न माजा, मुवत्ता, बैहक़ी, इरवाउल ग़लील जि. 4 स. 355 रक़म 1142 (क़ालल अल्बानी: सहीह)
हज़रत आइशा रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने एक सींगों वाला मेंढा लाने का हुक्म दिया और उस मेंढे को यह अल्फ़ाज़ कह कर ज़बह किया:
بِسَمِ اللہِ تَقَبَّلْ مِن مُحَمَّدٍ وَاٰلِ مُحَمَّدٍ وَمِنْ اُمَّۃِ مَحَمَّدٍ
बिस्मिल्लाही तक़ब्-बल मिन मुहम्मादिवं व आली मुहम्मादिवं व मिन
उम्मति मुहम्मद।
तर्जुमा: अल्लाह के नाम के साथ, ऐ अल्लाह मुहम्मद, आले मुहम्मद और उम्मते मुहम्मद की तरफ़ से क़ुबूल फ़रमा। (बाबु इस्तिजाबुल् अज़हिय्यह)
इमाम ख़त्ताबी ने तहरीर किया कि आप ﷺ का फ़रमान बिस्मिल्लाही तक़ब्-बल मिन मुहम्मादिवं व आली मुहम्मादिवं व मिन उम्मति मुहम्मद इस बात पर दलालत करता है कि एक बकरी की क़ुर्बानी आदमी और उसके घर की तरफ़ से किफ़ायत करती है अगरचा उनकी तादाद ज़्यादा ही क्यूं ना हो (मुआलिमुस् सुनन)।
1) अब्दुल्लाह बिन हिशाम रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि रसूलुल्लाह अपने सारे घर वालों की तरफ़ से एक बकरी की क़ुर्बानी करते थे। (अल-मुस्तदरक अलस् सहीहैन, किताबुल् अज़ाही वस् सुननुल् कुबरा, किताबुल् अज़हाया, बाब अर-रजुल अल-मुज़ही अन्हु व अ़न्न अहलि बैतिहि) इमाम हाकिम ने इसे सहीह क़रार दिया और हाफ़िज़ ज़हबी ने इनकी ताईद की है।
2) अबू क़नावह अपने घर वालों की तरफ़ से एक बकरी की क़ुर्बानी करते थे। (अस-सुननुल् कुबरा)
तम्बीह: सवाब हासिल करने के लिए एक से ज़ाइद क़ुर्बानियां दी जा सक्ती हैं।
0 Comments