ज़ुल् हिज्जा के दस दिनों में मुस्तहब आमाल
Hadees
अब्दुल्लाह बिन उमर और अबू हुरैरह रज़ियल्लाहू अन्हु ज़ुल् हिज्जा के दस दिनों में बाज़ार में तकबीर कहा करते थे, उनकी तकबीर सुन कर लोग भी तकबीर कहते। मुहम्मद बिन अली रज़ियल्लाहू अन्हु नफ़्ल नमाज़ों के बाद तकबीर कहते थे। (बुख़ारी तालीक़न: किताबुल् इदैन)
हफ़्सा रज़ियल्लाहू अन्हा बयान करती हैं कि अल्लाह के रसूल ﷺ ज़ुल् हिज्जा के 9 दिन, यौमे आशूरह और हर माह में तीन रोज़े रखा करते थे। (सुनन नसाई: किताबुस् सियाम 2417, क़ालल अल्बानी: सहीह) और इन दिनों में भी अरफ़ा (यानी 9 ज़ुल् हिज्जा) के रोज़े की मज़ीद ताकीद अहादीस़ में बयान की गई है, इरशादे नबवी ﷺ है कि अरफ़ा का रोज़ा अगले और पिछले दो साल के गुनाहों के लिए कफ़्फ़ारा है। (मुस्लिम किताबुस् सियाम जि. 3 स. 165)


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