ईदैन की नमाज़ का हुक्म:
अहले इल्म के सहीह तरीन क़ौल के मुताबिक़ ईदैन की नमाज़ वाजिब है, क्योंकि अल्लाह तआला ने इसका हुक्म दिया है। बहुत से अइम्मह तफ़्सीर के क़ौल के मुताबिक़ अल्लाह तआला के फ़रमान (فَصَلِّ لِرَبِّکَ وَانْحَرْ) (अल-कौसर: 2) में नमाज़ पढ़ने से मुराद ईद की नमाज़ है। इसके अलावा नबी करीम ﷺ का ईदैन की नमाज़ पाबंदी से अदा करना और कभी भी ईद की नमाज़ ना छोड़ना, लोगों को ईद की नमाज़ को निकलने का हुक्म देना, हत्ता कि हैज़ वाली औरतों और उन औरतों को जिनको दुपट्टा तक भी मयस्सर ना हो अपनी सहेलियों का दुपट्टा लेकर ईदगाह हाज़िर होने पर उभारना इस बात पर दलालत करता है कि ईदैन की नमाज़ हर मुसलमान पर वाजिब है। (अस-सैलुल् जर्रार जि. 1 स. 135, अर-रौज़तुन् नदिय्यह ज. 1 स. 358, बाब सलातुल् इदैन)

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