क़ुर्बानी का हुक्म:
क़ुर्बानी की ताक़त और हैसियत रखने वाले के हक़ में क़ुर्बानी करना सुन्नते मुअक्कदह है। अबू हुरैरह रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया जो शख़्स इस्तिताअत रखने के बावजूद क़ुर्बानी ना करे वह हमारे मुसल्ले के क़रीब ना आए। बअ्ज़ अहले इल्म ने इस बात को नबी ﷺ (के बजाए अबू हुरैरह रज़ियल्लाहू अन्हु) का क़ौल क़रार दिया है। (मुसनद अहमद, इब्न माजा, हाकिम) (सहीह अल् जामेअ् 6490 क़ालल अल्बानी: सहीह, रवाहु अल-हाकिम मर्फ़ूअन ह कज़ा व सह्हहु व मौक़ूफ़न वल् इल्लतु इश्बा)


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