क़ुर्बानी के जानवर उयूब से पाक हों:
बरॉ इब्न आज़िब रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया चार क़िस्म के जानवर क़ुर्बानी में जाएज़ नहीं (1) काना, जिसका काना पन ज़ाहिर हो (2) बीमार, जिसकी बीमारी वाज़ेह हो (3) लंगड़ा, जिसका लंगड़ा पन खुला हुवा हो (4) दुबला, जिस (की हड्डियों) में कोई गूदा ना हो (निहायत कमज़ोर)। (मुवत्ता, मुसनद अहमद, अबू दाऊद, तिर्मिज़ी, नसाई, इब्न माजा) अ़न्नल् बरा। सहीह अल् जामेअ् 886 क़ालल अल्बानी: सहीह)
अली रज़ियल्लाहु अन्हु से मरवी है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने हमको (क़ुर्बानी के) जानवर में आँख और कान को ग़ौर से देखने का हुक्म दिया और फ़रमाया कि वह जानवर ना ज़बह करें जो यक चश्म हो जिसके कान आगे या पीछे से कट कर लटक गए हों या जिसके कान लम्बाई या चौड़ाई में कटे हों (या जिसके कानों में सूराख़ हो) (मुसनद अहमद, अबू दाऊद, तिर्मिज़ी, इब्न माजा) (इरवाउल् ग़लील 4 स. 362 क़ालल अल्बानी: सहीह बि-मज्मूअ़् अत-तुरुक़)

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