Qurbani Ke Liye umda aur farbah jaanvar iqtiyaar karna chahiye







क़ुर्बानी के लिए उम्दा और फ़र्बह जानवर इख़्तियार करना चाहिए:
इरशादे बारी है:
(وَمَنْ یُعَظِّمْ شَعَائِرَ اللہِ فَإِ نَّھَا مِنْ تَقْوی الْقُلُوبِ)
अल्लाह की निशानियों की जो इज़्ज़त और ताज़ीम करे तो यह उसके दिल की परहेज़गारी की वजह से है। (सूरह हज: 32)

इस आयत की तफ़्सीर में अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा फ़रमाते हैं कि अल्लाह की निशानियों की इज़्ज़त और ताज़ीम से मुराद क़ुर्बानी के जानवरों को उम्दा और फ़र्बह करना है। (तफ़्सीर इब्न कसीर)
अबू उमामह इब्न सहल रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि हम ऐसा ही करते थे। (बुख़ारी तअ्लिक़न: किताबुल् अज़ाही: बाबु फ़ी अज़हिय्यतिन् नबिय्यि बि-कबशैनि अक़रनैनि व यज़करु समीनैनि)

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