Jabaah karne ki dua sahee ahadees ki roshnime

ज़बह करने की दुआ:


जानवर को क़ुर्बानी के लिए जब लिटा दें तो यूं कहे:

(إِنِّی وَجَّھْتُ وَجْھِیَ لِلَّذِی فَطَرَ السَّمَوَاتِ وَالْأَرْضِ عَلٰی مِلَّۃِ إِبْرَاھِیمَ حَنِیفًا وَّمَا أَنَا مِنْ الْمُشْرِکِینَ إِنَّ صَلَا تِی وَنُسُکِی وَمَحْیَایَ وَمَمَا تِی لِلہِ رَبِّ الْعَالَمِینَ لَاشَرِیکَ لَہُ وَبِذَالِکَ وَأُمِرْتُ وَأَنَا مِنْ الْمُسْلِمِین)


इन्नी वज्-जह्तु वज्-हिय लिल्लज़ी फ़-तरस् समावाति वल् अर्ज़ि अला मिल्लती इब्राहीम हनीफ़ौं व मा अना मिनल् मुशरिकीन, इन्नस् सलाति व नुसुकी व महयाया व ममाती लिल्लाहि रब्बिल् आलमीन, ला शरीका लहु व बि ज़ालिक व उमिर्तु व अना मिनल् मुस्लिमीन
यक़ीनन मैंने अपना रुख़ उस ज़ात की तरफ़ कर लिया है जिसने आस्मानों और ज़मीन को पैदा किया है, इब्राहीम अलैहिस् सलाम के तरीक़े पर इस हाल में कि मैंने अल्लाह के सिवा सब से मूँह मोड़ लिया है, और मैं मुश्रिकों में से नहीं हूं, यक़ीनन मेरी नमाज़ और मेरी क़ुर्बानी, मेरा जीना और मेरा मरना अल्लाह रब्बुल आलमीन के लिए है, उसका कोई शरीक नहीं, और मुझे इसी का हुक्म दिया गया है, और मैं अल्लाह का फ़रमांबरदार बन्दा हूं। (अबू दाऊद, इरवाउल ग़लील रक़म 1138 ज. 4 स. 350, क़ालल अल्बानी: सहीह

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