क़ुर्बानी का वक़्त:
क़ुर्बानी का वक़्त ईदुल-अज़हा की नमाज़ के बाद शुरू होता है और इसका आख़िरी वक़्त 13 ज़ुल् हिज्जा को ग़ुरूबे आफ़्ताब तक रहता है, इस दौरान कभी भी क़ुर्बानी की जा सक्ती है।
बरॉ बिन आज़िब रज़ियल्लाहू अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया कि (ईदुल-अज़हा के दिन) सब से पहले हम नमाज़ अदा करते, फिर नमाज़ से फ़ारिग़ होकर क़ुर्बानी करते थे। जो शख़्स ऐसा करे उसने हमारी सुन्नत को पा लिया और जिसने नमाज़ से पहले क़ुर्बानी कर ली वह क़ुर्बानी नहीं हुई बल्कि उसने महज़ गोश्त खाने के लिए जानवर ज़बह किया। (बुख़ारी: किताबुल् अज़ाही: बाब सन्नतु अज़्हिय्यह 5545। मुस्लिम: अल-अज़ाही: बाब वक़्तिहा 7:1961)


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